प्यार की राहें
प्यार की राहें कोमल होती,
मीठे सपनों से जुड़ी होती।
दिल की धड़कन संग बहती,
चाँदनी रातों में सजी होती।
एक नजर में दिल धड़काए,
सांसों में हलचल कर जाए।
बिन बोले सब कह जाए,
मन को बंधन में भर लाए।
सावन जैसी भीगी बातें,
फूलों जैसी कोमल रातें।
संग चले जो हाथ थामकर,
वो बनती हैं प्यारी यादें।
सागर जैसी गहरी होती,
नदी सी हर मोड़ पे बहती।
कभी धूप तो कभी छाँव सी,
हर हाल में संग रहती।
चुपके से मन को छू जाती,
भीनी-भीनी खुशबू लाती।
संग इसके हर दर्द मिटे,
खुशियों की बारिश हो जाती।
कभी गीतों में गूँजती है,
कभी आँखों से झलकती है।
इसे शब्दों में कैसे बाँधूँ,
यह तो एहसासों में बसती है।
राह कठिन हो, अंधेरा घना,
प्यार की लौ बुझती कहाँ?
जो सच है, सच्चा रहेगा,
हर जन्म संग चलता रहेगा।
सांसों से सांसों तक फैली,
रूह से रूह तक यह खेली।
दिल से दिल की जो राह जुड़े,
वहीं कहानी सच्ची ठहरी।
मिलकर भी ना मिलने वाली,
फिर भी हर पल संग चलने वाली।
प्यार की राहें यूँ ही रहेंगी,
हर युग में सदा खिलेंगी।
*कुंदन राज दत्ता “निश्छल”*







