सपनों की उड़ान
सपनों की उड़ान मैं एक औरत हूँ, एक गृहणी हूँ,चूल्हे – चौके में सिमटी, पर मैं भी कुछ सोचती हूँ,मेरे भी तो सपने हैं I सबने कहा सपने देखना छोड़ दो, औरत हूँ त्याग करूँ बस ,मैंने कहा- ये सपने ही तो मुझे जीना सिखाते हैं Iमुझे नहीं चाहिए ये ऊँचे महल, मुझे भी बनानी … Read more