सरहद के रखवाले
सरहद पर जो खड़े हैं, वो भारत की शान हैं,
माँ भारती के वीर सपूत, देश की पहचान हैं।
बर्फीली हवाओं में भी सीना ताने रहते हैं,
माटी की आन के खातिर हर पल जागते रहते हैं।
तपती धूप हो या फिर कड़ाके की ठंड हो,
उनके हौसलों के आगे हर मुश्किल मंद हो।
आँखों में तिरंगा, दिल में हिंदुस्तान रखते हैं,
देश की खातिर अपना हर अरमान रखते हैं।
घर से दूर रहकर भी घर की रक्षा करते हैं,
अपने हिस्से की खुशियाँ देश के नाम करते हैं।
माँ की ममता याद आए तो आँखें नम हो जाती हैं,
पर भारत माँ की पुकार उन्हें फिर मजबूत बनाती है।
राखी की डोरी से बढ़कर कर्तव्य निभाते हैं,
बहन के आँसू दिल में रखकर सीमा पर जाते हैं।
बच्चों की मुस्कान को सीने में बसाए रखते हैं,
देश के करोड़ों सपनों को अपना बनाए रखते हैं।
रात अँधेरी हो, फिर भी दीपक बन जलते हैं,
दुश्मन की हर चाल के आगे चट्टान बन खड़े रहते हैं।
उनकी बंदूक में केवल शक्ति नहीं, विश्वास है,
उनकी हर साँस में भारत माँ का निवास है।
तिरंगे की आन के लिए जीवन तक वार देते हैं,
भारत की मिट्टी पर अपना सर्वस्व हार देते हैं।
उनके त्याग से सुरक्षित हर घर का आँगन है,
उनके साहस से मुस्कुराता अपना हिंदुस्तान है।
सलाम उन वीरों को, सलाम उनकी जवानी को,
सलाम उनकी शहादत को, सलाम उनकी कहानी को।
जब तक सूरज-चाँद रहेगा, उनका मान रहेगा,
भारत की धरती पर उनका गुणगान रहेगा।
हे वीर जवानों, तुमसे ही देश महान है,
तुमसे ही तिरंगे की ऊँची शान है।
तुम हो तो सुरक्षित मेरा प्यारा हिंदुस्तान,
सरहद के रखवालों को शत-शत प्रणाम।
*कुंदन राज दत्ता “निश्छल*







1 thought on “सरहद के रखवाले”