पितृ तर्पण

पितृ तर्पण जल की कुछ बूँदें लेकर, जब स्मृतियों को सींचते हैं, आँखों में बीते कल की छवि, मन में अपने ज़ब खोजते हैं। जिन हाथों ने हमें थामकर, जीवन की राह दिखाई थी, जिनकी उँगली पकड़कर, हमने दुनिया समझी थी। आज वही हाथ नहीं हैं, पर उनके संस्कार शेष हैं, उनकी कही हुई हर … Read more