Sweety srivastava (Champion)
पितृ तर्पण
जल की कुछ बूँदें लेकर,
जब स्मृतियों को सींचते हैं,
आँखों में बीते कल की छवि,
मन में अपने ज़ब खोजते हैं।
जिन हाथों ने हमें थामकर,
जीवन की राह दिखाई थी,
जिनकी उँगली पकड़कर,
हमने दुनिया समझी थी।
आज वही हाथ नहीं हैं,
पर उनके संस्कार शेष हैं,
उनकी कही हुई हर सीख में,
जीवन के उजले अर्थ विशेष हैं।
तर्पण केवल जल देना नहीं,
यह ऋण स्वीकारना होता है,
जिनसे मिला हमारा अस्तित्व,
उनके आगे शीश झुकाना होता है।
थोड़ा जल जब अर्पित करते,
मन भी निर्मल हो जाता है,
स्मृतियों का सूना आँगन,
फिर से जैसे भर जाता है।
पितरों का आशीष यही है,
सत्य की राह कभी न छोड़ें,
मूल्यों की जो थाती पाई,
उसे आने वाली पीढ़ी से जोड़ें।
हम उनके वंशज कहलाएँ,
इतना ही पर्याप्त नहीं,
उनके आदर्शों को जी पाएँ,
इससे बड़ा कोई तर्पण नहीं।
आज जल की अंजलि देकर,
बस इतनी-सी प्रार्थना है…
जहाँ कहीं भी हों वे अपने,
उन पर प्रभु की छत्रछाया है।
हममें उनकी सीख रहे,
हममें उनका मान रहे,
जब तक धड़कन शेष रहे,
पितरों का सम्मान रहे।
जल अर्पित कर लौट न जाएँ,
उनकी राह भी अपनाएँ हम,
जो विरासत उनसे पाई है,
उसका मान बढ़ाएँ हम।
तर्पण तब ही पूर्ण होगा,
जब जीवन में संस्कार रहे ,
पितरों की स्मृति दीपक बनकर,
हमारे पथ का प्रकाश बने।
हैं,
आँखों में बीते कल की छवि,
मन में अपने ज़ब खोजते हैं।
जिन हाथों ने हमें थामकर,
जीवन की राह दिखाई थी,
जिनकी उँगली पकड़कर,
हमने दुनिया समझी थी।
आज वही हाथ नहीं हैं,
पर उनके संस्कार शेष हैं,
उनकी कही हुई हर सीख में,
जीवन के उजले अर्थ विशेष हैं।
तर्पण केवल जल देना नहीं,
यह ऋण स्वीकारना होता है,
जिनसे मिला हमारा अस्तित्व,
उनके आगे शीश झुकाना होता है।
थोड़ा जल जब अर्पित करते,
मन भी निर्मल हो जाता है,
स्मृतियों का सूना आँगन,
फिर से जैसे भर जाता है।
पितरों का आशीष यही है,
सत्य की राह कभी न छोड़ें,
मूल्यों की जो थाती पाई,
उसे आने वाली पीढ़ी से जोड़ें।
हम उनके वंशज कहलाएँ,
इतना ही पर्याप्त नहीं,
उनके आदर्शों को जी पाएँ,
इससे बड़ा कोई तर्पण नहीं।
आज जल की अंजलि देकर,
बस इतनी-सी प्रार्थना है…
जहाँ कहीं भी हों वे अपने,
उन पर प्रभु की छत्रछाया है।
हममें उनकी सीख रहे,
हममें उनका मान रहे,
जब तक धड़कन शेष रहे,
पितरों का सम्मान रहे।
जल अर्पित कर लौट न जाएँ,
उनकी राह भी अपनाएँ हम,
जो विरासत उनसे पाई है,
उसका मान बढ़ाएँ हम।
तर्पण तब ही पूर्ण होगा,
जब जीवन में संस्कार रहे ,
पितरों की स्मृति दीपक बनकर,
हमारे पथ का प्रकाश बने।
© स्वीटी श्रीवास्तव
जज़्बातों की कलम से
वाराणसी
Whatsapp Number : usp_whatsapp : 8808446666
Support Writer
Agar Sweety srivastava ki is rachna ne aapke hriday ko chhua ho, toh unki kalam aur sahityik prayas ko aage badhane hetu ek chhota sa sneha-sammaan bhent karein:








