“जीवन की माया”

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Sweety srivastava (Champion)
जीवन की माया

जीवन की माया भी देखो, कैसी अजब कहानी है,
आज खुशी का मेला है,तो कल आँखों में पानी है।

कल तक जो अपने लगते थे, आज वही बेगाने हैं,
वक्त बदलते ही रिश्तों के, कितने बदले मायने हैं।

मुट्ठी में भरने निकले थे, रेत समय की फिसल गई,
मन ने जितना रोकना चाहा, उतनी ही मुट्ठी खाली हुई।

महलों के सपने सजाए, फिर भी नींद कहाँ आती है,
जिस सुख को बाहर ढूँढ़ें हम, वह भीतर मुस्काती है।

नाम, यश, धन सब यहीं रहेंगे, साथ नहीं कुछ जाना है,
इस माया के मेले में बस, प्रेम ही सच्चा खजाना है।

मोह-जाल से ऊपर उठकर, मन को यही समझाना है,
जीवन चाहे जैसा मिले, हँसकर उसको जी जाना है।

**— स्वरचित एवं मौलिक**
**❝© स्वीटी❞**
**जज़्बातों की कलम से**

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