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पतझड़ के सूखे पत्ते

Sweety srivastava • Superstar Writer • Sahitya Ratna

पतझड़ के सूखे पत्ते

कुछ यूँ ही नहीं बिखर जाते…

ये भी कभी शाखों पर,

हरियाली के गीत सुनाते।

कल तक जो हवाओं संग..

मुस्कुराते झूमते थे,

आज वही पत्ते ज़मीं पर..

खामोशी से टूटते हैं।

इनमें भी छुपी होती है..

एक अधूरी सी कहानी,

कुछ बिछड़ने का दर्द…

और कुछ बीते कल की निशानी।

हर पत्ता कहता है चुपके से—

“छोड़ना भी जरूरी होता है”,

क्योंकि हर अंत के बाद ही…

एक नया सफर शुरू होता है।

पतझड़ सिखाता है हमें

खुद से खुद को मिलाना,

जो छूट गया उसे जाने देना

और फिर से मुस्कुराना।

ये सूखे पत्ते याद दिलाते हैं,

कि गिरना हार नहीं होता,

कभी-कभी बिखर जाना भी…

एक नई शुरुआत का हिस्सा होता है ।

तो मत रो इन गिरते पत्तों पर,

ये जीवन का सार बताते हैं…

जो कल तक अपने थे,

वो भी एक दिन बिछड़ जाते हैं।

पर हौसला रखना ऐ दिल,

बस इतना याद रखना…

हर पतझड़ के बाद ही,

बसंत फिर लौट आता है…।।

स्वरचित

स्वीटी श्रीवास्तव “जज्बातों की पोटली से ”

 

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Author

Muktika Sahityakar