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मैं अपनी कहानी खुद हूँ

मैं अपनी कहानी खुद हूँ मैं खुद अपनी ज़िंदगी की कहानी हूँ, किरदार भी मैं, और अपनी ही ज़ुबानी हूँ। कभी गिरकर भी संभलना सीखा है मैंने, हर मोड़ पर खुद को ही थामना सीखा है मैंने। किसी और की कलम की मोहताज़ नहीं, मैं अपने फैसलों की निगहबान रही हूँ, जो भी लिखा है … Read more

पतझड़ के सूखे पत्ते

पतझड़ के सूखे पत्ते कुछ यूँ ही नहीं बिखर जाते… ये भी कभी शाखों पर, हरियाली के गीत सुनाते। कल तक जो हवाओं संग.. मुस्कुराते झूमते थे, आज वही पत्ते ज़मीं पर.. खामोशी से टूटते हैं। इनमें भी छुपी होती है.. एक अधूरी सी कहानी, कुछ बिछड़ने का दर्द… और कुछ बीते कल की निशानी। … Read more