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जिंदगी का सबसे मुश्किल फैसला

जिंदगी का सबसे मुश्किल फैसला

जिंदगी का सबसे मुश्किल फैसला “अब तक का सबसे मुश्किल फैसला तेइस, चौबीस साल… कोई छोटी अवधि नहीं होती। इतने वर्षों में एक घर की दीवारों से अपनापन हो जाता है, आँगन की मिट्टी अपनी लगने लगती है और # अब तक का सबसे मुश्किल फैसला बाईस साल… कोई छोटी अवधि नहीं होती। इतने वर्षों … Read more

सागर हूँ मैं

सागर हूँ मैं सागर हूँ, हर दर्द को गहराई में छुपा लेती हूँ, लहरों की तरह उठती हूँ, फिर खुद को सँभाल लेती हूँ। मेरी खामोशी को मेरी कमज़ोरी समझने वालों, मैं तूफ़ानों में भी अपना अस्तित्व बचा लेती हूँ। कितने ही पत्थर आकर मेरी राह रोकते हैं, कितने ही तूफ़ान मेरे तट से टकराते … Read more

पीर से प्रखरता तक

पीर से प्रखरता तक मन की पीर कहूँ किससे, मन ही मन सहती हूँ, हँसकर दुनिया के आगे, भीतर से मैं बहती हूँ। आँखों में जो ठहरा सावन, किसको दिखलाऊँ मैं, होठों पर मुस्कान सजा, सबसे दर्द छिपाऊँ मैं। अपने ही कुछ प्रश्नों का, उत्तर कभी नहीं मिला, भीड़ बहुत थी चारों ओर, फिर भी … Read more