सागर हूँ मैं
सागर हूँ मैं सागर हूँ, हर दर्द को गहराई में छुपा लेती हूँ, लहरों की तरह उठती हूँ, फिर खुद को सँभाल लेती हूँ। मेरी खामोशी को मेरी कमज़ोरी समझने वालों, मैं तूफ़ानों में भी अपना अस्तित्व बचा लेती हूँ। कितने ही पत्थर आकर मेरी राह रोकते हैं, कितने ही तूफ़ान मेरे तट से टकराते … Read more