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पतझड़ के सूखे पत्ते

पतझड़ के सूखे पत्ते कुछ यूँ ही नहीं बिखर जाते… ये भी कभी शाखों पर, हरियाली के गीत सुनाते। कल तक जो हवाओं संग.. मुस्कुराते झूमते थे, आज वही पत्ते ज़मीं पर.. खामोशी से टूटते हैं। इनमें भी छुपी होती है.. एक अधूरी सी कहानी, कुछ बिछड़ने का दर्द… और कुछ बीते कल की निशानी। … Read more