मोहब्बत का गुलाबी रंग
मोहब्बत का गुलाबी रंग गुलाबी आभा में तुम,जैसे भोर की पहली लाली,सज गई हो प्रेम की देवी,बनकर मन की हरियाली। माथे की बिंदी कहती है,चाँद भी तुमसे शरमाए,माँग का सिंदूर सुहाग बन,जीवन में मधुमास जगाए। मोती जड़ी वह मांगटीका,नभ के तारों-सा दमके,नयनों की गहरी चितवन में,लाखों सावन आकर थमके। अधरों पर मुस्कान खिले,जैसे गुलाब की … Read more