अधूरी ही ठीक लगती है…
अधूरी ही ठीक लगती है… मोहब्बत अधूरी ही ठीक लगती है, मुकम्मल हो जाने पर मोहब्बत कहाँ रहती है। वह जो एक अधूरापन है दरमियां, वही तो ज़िंदा रखता है दास्ताँ, जो मिल गए तुम और हम मुकम्मल होकर, तो ढल जाएगी इस इश्क़ की जवां सुब्ह-ओ-शाम। पा लेने की चाह में जो तड़प है … Read more