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तुम मैं और वो ढलती शाम

तुम, मैं और वो ढलती शाम क्षितिज पर सूरज की लाली है छाई, एक खामोश सी मदहोशी है छाई। दूर तलक बस खामोश नजारा है, हाथों में हाथ, बस तेरा सहारा है। वो ढलती शाम और यादें तुम्हारी, जैसे कोई अधूरी सी कहानी हमारी। आसमां ने ओढ़ ली है केसरिया चादर, तुम पास हो तो … Read more