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यादों की अमराई

यादों की अमराई यादों की अमराई में, मन फिर डोले आज, बीते मौसम गुनगुनाएँ , छेड़ें मधुर तान। आम्र-बौर की खुशबू लेकर, आती पुरवाई, मन के सूने आँगन में फिर, महकी अमराई। डाली-डाली झूल रही हैं, बचपन की मुस्कान, पत्तों-पत्तों पर लिखी है, अपनों की पहचान। यादों की अमराई में, मन फिर डोले आज, बीते … Read more