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यादों की अमराई

Sweety Srivastava • Superstar Writer • Sahitya Ratna

यादों की अमराई

यादों की अमराई में, मन फिर डोले आज,
बीते मौसम गुनगुनाएँ , छेड़ें मधुर तान।

आम्र-बौर की खुशबू लेकर, आती पुरवाई,
मन के सूने आँगन में फिर, महकी अमराई।
डाली-डाली झूल रही हैं, बचपन की मुस्कान,
पत्तों-पत्तों पर लिखी है, अपनों की पहचान।

यादों की अमराई में, मन फिर डोले आज,
बीते मौसम गुनगुनाएँ , छेड़ें मधुर तान।

कच्ची अमियों की खट्टी-मीठी, यादें हैं अनमोल,
कोयल की वह कूक सुनाती, बीते दिनों के बोल।
माटी की सौंधी खुशबू में, बसा हुआ संसार,
छोटी-छोटी खुशियों से था, जीवन तब गुलज़ार।

माँ की ममता, आँगन की रौनक, अपनों का विश्वास,
समय चुरा ले गया भले ही, वो प्यारा मधुमास।
फिर भी मन की अमराई में, खिलते वही निशान,
यादों के इन फूलों से ही, महक रहा जहान।

जब जीवन की धूप सताए, थक जाए इंसान,
यादों की शीतल छाँव में, मिल जाता विश्राम।
बीते कल की मधुर सुगंधें, देतीं नई उड़ान,
बाबुल का वह स्नेहिल आँगन, करता मुझसे बात।

यादों की अमराई में, मन फिर डोले आज,
बीते मौसम गुनगुनाएँ, छेड़ें मधुर तान।

स्वरचित ✍🏼
स्वीटी श्रीवास्तव

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Author

Muktika Sahityakar