Abhi is lekh ko 84 log padh rahe hain

बेहिसाब लगता है

सवाल थे खड़े, जिनका जवाब लगता है, अभी का नहीं, पुराना हिसाब लगता है। समंदरों की सच्चाई यह भी होती है, बहता- जीवन,उछलता- अज़ाब लगता है।” पढ़ते हैं इस तरह से सभी काम छोड़, वजूद मेरा सभी को किताब लगता है। उठा अभी सोकर, ख़्वाब थका-रोकर, अब तोड़ेगा बेड़ियाँ, बेताब लगता है। ख़ुशबू है, रंग … Read more