बेहिसाब लगता है
सवाल थे खड़े, जिनका जवाब लगता है, अभी का नहीं, पुराना हिसाब लगता है। समंदरों की सच्चाई यह भी होती है, बहता- जीवन,उछलता- अज़ाब लगता है।” पढ़ते हैं इस तरह से सभी काम छोड़, वजूद मेरा सभी को किताब लगता है। उठा अभी सोकर, ख़्वाब थका-रोकर, अब तोड़ेगा बेड़ियाँ, बेताब लगता है। ख़ुशबू है, रंग … Read more