Abhi is lekh ko 84 log padh rahe hain

शायद चांद भी यही सोचता होगा

शायद चांद भी यही सोचता होगा, कि कोई तो है, जो मेरी रोशनी से आगे मुझे देखता होगा,, दागों को छुपाने की कोशिश नहीं करता, मेरी खामोशी में छिपी कहानी पढ़ता होगा,, लहरें अक्स तोड़ती रहें, उसे अब फर्क कहां पड़ता होगा, जब कोई उसके बिखरे हुए हिस्सों को भी अपना कहता होगा,, हां, वो … Read more