Abhi is lekh ko 84 log padh rahe hain

फ़िर भी बचा रह जाता है

फ़िर भी बचा रह जाता है ।

यह कैसा, प्रेम का नाता है?

कितनी भी ,अनबन हो चाहे ।

यह पुनः ,लौट कर आता है।

जितना बचना ,चाहें इससे ।

यह उतना, बढ़ता जाता है।

हटाकर घृणा, को यह पुनः।

अपना स्थान, बनाता है ।

सबकी चालों, को सहकर भी।

यह हर क्षण , बढ़ता जाता है।

सारे द्वेषों के ऊपर यह ,

विजय सदैव ही पाता है।

यह कैसा,प्रेम का नाता है?

pragati dutt

Read more

Email

Whatsapp Number : usp_whatsapp : 07055145050