हे दुर्गे माँ
हे दुर्गे माँ हे दुर्गे माँ शेर वाहिनी क्युं युद्धों से धरती ये जल रही है मासूम प्राणी ड़रे हुए हैं क्यूं उनकी धड़कन दहल रहीं है हे दुर्गा माँ कब थमेगी नफरत क्यूं हिंसा हर देश पल रही है हैं सांसें अपनी खुदी की धड़कन क्यूँ प्यारे लम्हे यूँ छल रही है हे दुर्गा … Read more