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हे दुर्गे माँ
हे दुर्गे माँ हे दुर्गे माँ शेर वाहिनी क्युं युद्धों से धरती ये जल रही है मासूम प्राणी ड़रे हुए हैं क्यूं उनकी धड़कन दहल रहीं है हे दुर्गा माँ कब थमेगी नफरत क्यूं हिंसा हर देश पल रही है हैं सांसें अपनी खुदी की धड़कन क्यूँ प्यारे लम्हे यूँ छल रही है हे दुर्गा … Read more
अंधेरों की परवरिश
अंधेरों की परवरिश क्या ये अंधेरों की परवरिश है जो चाँद इतना चमक रहा है कोई तो रिश्ता है रोशनी से अंधेरा सदियों से संग खड़ा है जो एक दिन छू लिया था तुमने वो पतझड़ों में शज़र हरा है हम अपनी धड़कन से थक गये है सांसें छोटी या दिन बड़ा है उदासियां क्यूँ … Read more