Abhi is lekh ko 84 log padh rahe hain

अंधेरों की परवरिश

अंधेरों की परवरिश क्या ये अंधेरों की परवरिश है जो चाँद इतना चमक रहा है कोई तो रिश्ता है रोशनी से अंधेरा सदियों से संग खड़ा है जो एक दिन छू लिया था तुमने वो पतझड़ों में शज़र हरा है हम अपनी धड़कन से थक गये है सांसें छोटी या दिन बड़ा है उदासियां क्यूँ … Read more