अंधेरों की परवरिश
अंधेरों की परवरिश क्या ये अंधेरों की परवरिश है जो चाँद इतना चमक रहा है कोई तो रिश्ता है रोशनी से अंधेरा सदियों से संग खड़ा है जो एक दिन छू लिया था तुमने वो पतझड़ों में शज़र हरा है हम अपनी धड़कन से थक गये है सांसें छोटी या दिन बड़ा है उदासियां क्यूँ … Read more