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मन की गहरी थाह

पाना बड़ा है मुश्किल, मन की गहरी थाह। कोई नहीं रुक पाए, सब की अपनी राह। थामे यकी की डोरी,और पतंगें चाह, कट गिरी,लंबी हुई, उलझी वक्त गवाह। मशरूफ इतनी दुनिया, खुद ही खुद में आज, इंसाफ की कमजोरी,है मुस्तैद गुनाह। फितरत इंसां की बदली, कुदरत का सैलाब, रोते जंगल जीवों की, सुन ना पाए … Read more