Abhi is lekh ko 84 log padh rahe hain

चिट्ठी

चिट्ठी कभी-कभी सोचती हूँ, अगर वो चिट्ठी तुम तक पहुँच जाती, तो क्या तुम मेरे दर्द को समझ पाते? क्या मेरी ख़ामोशी के पीछे छिपी मोहब्बत, तुम्हें कभी नज़र आ पाती? या फिर तुम उसे भी पढ़कर रख देते, मेरी बाकी बातों की तरह अनसुना करके, और मैं एक बार फिर टूट जाती, तुमसे कुछ … Read more