चिट्ठी
कभी-कभी सोचती हूँ,
अगर वो चिट्ठी तुम तक पहुँच जाती,
तो क्या तुम मेरे दर्द को समझ पाते?
क्या मेरी ख़ामोशी के पीछे छिपी मोहब्बत,
तुम्हें कभी नज़र आ पाती?
या फिर तुम उसे भी पढ़कर रख देते,
मेरी बाकी बातों की तरह अनसुना करके,
और मैं एक बार फिर टूट जाती,
तुमसे कुछ कहने की हिम्मत खोकर…
अब न कोई शिकायत है,
न तुमसे कोई सवाल बाक़ी है,
बस एक चिट्ठी है, जो अधूरी है,
और एक कहानी, जो आज भी तुम्हारे नाम बाक़ी है।
कुछ चिट्ठियाँ भेजी नहीं जातीं,
कुछ बातें कही नहीं जातीं,
और कुछ मोहब्बतें ऐसी होती हैं…
जो दिल में तो उम्रभर रहती हैं,
मगर उनकी कहानियाँ कभी पूरी नहीं होतीं।
— वो चिट्ठी, जो सिर्फ़ मेरा दिल पढ़ पाया…
Vidhi saini
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Agar Vidhi saini ki is rachna ne aapke hriday ko chhua ho, toh unki kalam aur sahityik prayas ko aage badhane hetu ek chhota sa sneha-sammaan bhent karein:








