Abhi is lekh ko 84 log padh rahe hain

वो अधूरी मुलाक़ात और खामोशियाँ

वो अधूरी मुलाक़ात और खामोशियाँ   शहरों की भीड़ में कुछ लोग ऐसे मिलते हैं, जिनसे मिलने के लिए हम कभी निकले ही नहीं होते। न कोई तय जगह होती है, न कोई तय समय। बस अचानक किसी स्क्रीन पर एक नाम दिखाई देता है, कुछ शब्द पढ़ने को मिलते हैं और फिर पता ही … Read more