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तुम छोड़ देना उस ससुराल को

Anita Shekhawat Rajasthani • Superstar Writer • Sahitya Ratna

तुम छोड़ देना उस ससुराल को

जब घुटन  हद से बढ़ जाए।
साँस भी मुश्किल हो जाए।
मेरी बहन
तुम छोड़ देना उस ससुराल को
जो परिवार तुम्हे न अपना पाए।

जब मुस्कान तेरी  छिन जाए।
आँखों से काजल बह  जाए।
मेरी बहन
तुम छोड़ देना उस ससुराल को
जो परिवार तुम्हें न अपना पाए।

जब सूकून हृदय का छिन जाए।
दर्द दिल का बढ़ जाए।
मेरी बहन
तुम छोड़ देना उस ससुराल को
जो परिवार तुम्हें न अपना पाए।

जब चुनर सर से फट जाए।
तेरा आँचल  गीला हो जाए।
मेरी बहन
तुम छोड़ देना उस ससुराल को
जो परिवार तुम्हें न अपना पाए।

जब हाथ से पल्लू गिर जाए।
पाँव की पायल खो जाए।
मेरी बहन
तुम छोड़ देना उस ससुराल को
जो परिवार तुम्हें न अपना पाए।

जब स्वाभिमान तेरा छिन जाए।
खामोश लब तेरे हो जाए।
मेरी बहन
तुम छोड़ देना उस ससुराल को
जो परिवार तुम्हें न अपना पाए।

जब जीवन भँवर में फँस जाए।
एहसास मरण सा हो जाए।
मेरी बहन
तुम छोड़ देना उस ससुराल को
जो परिवार तुम्हें न अपना पाए।  

जब घुटन  हद से बढ़ जाए।
साँस भी मुश्किल हो जाए।
मेरी बहन
तुम छोड़ देना उस ससुराल को
जो परिवार तुम्हे न अपना पाए। 
मेरी बहन………

अनिता शेखावत राजस्थानी

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Author

Muktika Sahityakar