ड्रिस्टेशन से कैसे लड़े How to fight distraction

दिन – शुक्रवार

दिनांक – 21 8 2026

विषय – ड्रिस्टेशन से कैसे लड़े

जीवन के रास्तों पर चलते-चलते कभी-कभी एक ऐसा मोड़ आता है, जहाँ चारों तरफ केवल गहरा सन्नाटा और मायूसी नज़र आती है। जब मन की उम्मीदें टूटने लगती हैं और हर राह बंद सी महसूस होती है, तब इंसान डिस्पिरेशन यानी घोर निराशा के भंवर में फँस जाता है। लेकिन यही वह वक्त होता है जब हमें अपने भीतर छिपी असीम शक्ति को पहचानना होता है। यह कविता इसी संघर्ष, बेबसी और फिर उस निराशा को चीरकर बाहर निकलने के अटूट विश्वास की कहानी है:

डिप्रेशन से लड़ना एक लंबी और कठिन यात्रा हो सकती है, लेकिन याद रखें कि आप इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं। यहां एक कविता है जो इस संघर्ष और उससे उबरने की यात्रा को दर्शाती है:

उम्मीद की एक किरण

अंधेरों के घेरे में हूं मैं कैद,

दिल में एक अजब सी है डर का साया।

हर खुशी लगती है खोई-खोई सी,

जैसे जीवन से सब कुछ छीन लिया गया हो।

हर दिन एक जंग है खुद से मेरी,

जीने की कोई वजह नज़र नहीं आती।

हर राह लगती है बंद सी,

जैसे मंजिल तक जाने का कोई रास्ता न हो।

लेकिन याद है मुझे एक पुराने दोस्त की बात,

कि अंधेरे के बाद ही तो सवेरा आता है।

कि हर रात की एक सुबह होती है,

और हर दुख के बाद ही तो सुख आता है।

तो मैं अब हार नहीं मानूंगी,

इस अंधेरे से लड़ने का साहस जुटाएंगी।

अपने अंदर की उम्मीद की एक किरण जगाऊंगी,

और फिर से मुस्कुराएंगी।

मन के कोने-कोने को टटोलूंगा,

उस खुशी को फिर से ढूंढ निकालूंगा।

जो कभी मेरे जीवन का हिस्सा थी,

और जिसे मैंने खो दिया था।

अपनों से बात करूंगी,

उनके साथ अपनी तकलीफ साझा करूंगा।

क्योंकि मुझे पता है कि वे मुझे समझते हैं,

और वे मुझे इस लड़ाई में अकेला नहीं छोड़ेंगे।

ज़रूरत पड़ी तो पेशेवर मदद लूंगी,

एक थेरेपिस्ट से बात करूंगी।

क्योंकि मुझे पता है कि इसमें कोई शर्म की बात नहीं है,

और यह मेरी मदद करेगा इस बीमारी से लड़ने में।

मैं फिर से जीना सीखूंगी,

हर पल का आनंद लूंगी।

और इस अंधेरे से बाहर निकलकर,

उम्मीद की एक नई सुबह देखूंगा।

मुझे पता है कि यह आसान नहीं होगा,

लेकिन मैं हार नहीं मानूंगी।

मैं लडूंगी, मैं जीतूंगी,

और एक दिन, मैं फिर से खुश हो जाऊंगा।

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