तुझे ढुंढु कहां
*शीर्षक,,, तुझे ढुंढु कहां:* “”””””””“”””””””””””””””””” हर नजरें पुकारती है, हर नजरों में तड़प है, अल्फाज उगलते इश्क, तन्हा रातों सा गगन है में आशिक दीवाना हो गया जिसका, पता नहीं कहां ढूंढू ठिकाना उसका , ये रात का सन्नाटा काली अमावस से कम नहीं बहारों ने रंग बरसाया बस गम ये कि वो पास नहीं … Read more