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टूटकर भी निखरना

टूटकर भी निखरना रेज़ा-रेज़ा बिखरी तो क्या, हिम्मत मेरी टूटी नहीं, आँधियों के बीच भी उम्मीद मेरी छूटी नहीं। हर टुकड़े को जोड़कर फिर ख़ुद को सँवार लिया, ज़िंदगी ने जितना तोड़ा, मैंने उतना निखार लिया। राहों में काँटे मिले, फिर भी कदम रुके नहीं, आँखों में आँसू थे, पर सपने कभी झुके नहीं। जिसने … Read more