Abhi is lekh ko 84 log padh rahe hain

चलती रही तो राह बनती गई

 चलती रही तो राह बनती गई काँटों भरी राहों पर भी, हँसकर चलती रही, आँधियों में आशा का दीप बनकर जलती रही। कदम-कदम पर ठोकरें थीं, प्रश्नों के जंजाल थे, मेरे दृढ़ संकल्प के आगे, बौने हर व्यवधान थे। किसी ने कहा, ठहर जा, मंज़िल बहुत दूर है, मैंने कहा, चलते रहना ही, सपनों का … Read more

बचपन वाली दुर्गा पूजा

बचपन वाली दुर्गा पूजा

बचपन वाली दुर्गा पूजा  (संस्मरण ) बचपन वाली दुर्गा पूजा कालीबाड़ी की माँ बचपन की कुछ यादें समय की धूल से कभी धुँधली नहीं पड़तीं। त्योहारों की खुशबू, अपनों का साथ और उन दिनों की छोटी-छोटी खुशियाँ मन के किसी कोने में हमेशा जीवित रहती हैं। जब भी दुर्गा पूजा की बात होती है, मेरा … Read more

टूटकर भी निखरना

टूटकर भी निखरना रेज़ा-रेज़ा बिखरी तो क्या, हिम्मत मेरी टूटी नहीं, आँधियों के बीच भी उम्मीद मेरी छूटी नहीं। हर टुकड़े को जोड़कर फिर ख़ुद को सँवार लिया, ज़िंदगी ने जितना तोड़ा, मैंने उतना निखार लिया। राहों में काँटे मिले, फिर भी कदम रुके नहीं, आँखों में आँसू थे, पर सपने कभी झुके नहीं। जिसने … Read more