अधूरे सपने

*अधूरे सपने* बचपन की धूप में एक सपना पलता था, हाथ में बल्ला था, दिल में आस जलता था। हर गली मेरा छोटा-सा मैदान बन जाती, हर जीत मेरी दुनिया को मुस्कुराती। मैं भी नीली जर्सी पहनना चाहता था, तिरंगे के लिए मैदान में उतरना चाहता था। हर चौके पर माँ की आँखें चमकतीं, हर … Read more

सुकून की असली क़ीमत

सुकून की असली क़ीमत ईमानदारी होती है, ईमानदारी की राह अक्सर आसान नहीं होती। सच बोलने वाला कई बार अकेला पड़ जाता है, पर उसका आत्मसम्मान उसके साथ रहता है। झूठ पलभर की जीत दे सकता है, मगर ईमानदारी जीवनभर का सुकून और विश्वास दिलाती है।

माँ की ओढ़नी

माँ, आँचल,त्याग, मातृ *1- माँ की ओढ़नी* बरसों से मौसम आते-जाते, माँ का मौसम एक रहा, खुद भीगती रही सदा, मुझ पर उसका स्नेह रहा। साड़ी की छोटी-सी छाया, मेरे लिए आकाश बनी, उसकी हर भीगी हुई सिलवट, मेरी जीवन-ढाल बनी। मैंने बारिश देखी केवल, उसने चिंता की बूँदें ओढ़ीं, मेरे हिस्से धूप बचाने, अपनी सारी खुशियाँ छोड़ी। माँ का आँचल छत नहीं, ईश्वर का ही विस्तार है, जिसकी छाया में मिट जाए हर भय, हर संताप है। जब भी जीवन आँधी बनकर, मेरे साहस को परखेगा, एक भीगी माँ का आँचल ही मुझे सँभालेगा। ममता का मूल्य कहाँ मिलता, धन-दौलत के बाज़ारों में, माँ हर मौसम भीग जाती है… सिर्फ़ बच्चों की मुस्कानों में।प्रेम

सृष्टि के चमत्कार

प्रकृति के चमत्कार जब सृष्टि ने अपने प्रथम स्वप्न का उन्मीलन किया,।। ( मेरी कविता में उन्मीलन शब्द का अर्थ ….. जब सृष्टि ने अपने पहले स्वप्न को अभिव्यक्त किया ) तभी प्रकृति ने अपने हरित करों से धरा के मस्तक पर जीवन का तिलक अंकित किया। उषा की अरुणिमा जब क्षितिज के अधरों पर मुस्कान धरती है, तब प्रत्येक ओस-कण मानो सूर्य का लघु प्रतिरूप बन अस्तित्व का अभिनंदन करता है। पर्वत केवल शिलाओं का संचय नहीं, वे कालजयी धैर्य के महामंत्र हैं; नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं, वे करुणा की अखंड प्रवहमान ऋचाएँ हैं। वन की निस्तब्धता में अनहद निनाद का आलोक छिपा है, पवन के प्रत्येक स्पंदन में ईश्वर का अप्रकट आलिंगन स्पंदित होता है। इंद्रधनुष जब नभ पर सप्तवर्णी स्वप्न उकेरता है, तब प्रतीत होता है— मानो स्वयं विधाता ने आकाश पर आशा का महाकाव्य लिख दिया हो। पुष्पों की सुरभि, भ्रमरों का गुंजन, कोयल का मधुर आलाप, मयूर का वर्षा-विलास— ये सब प्रकृति के मौन श्लोक हैं, जिन्हें केवल संवेदनशील हृदय ही पढ़ पाता है। बीज का वटवृक्ष बन जाना, निर्जीव प्रतीत होती मिट्टी से अनगिनत जीवनों का प्रस्फुटित हो उठना, शिशिर के पश्चात पुनः वसंत का लौट आना— क्या ये किसी चमत्कार से कम हैं? चंद्रमा की शीतल चाँदनी जब थके हुए जगत पर अमृत बरसाती है, तब प्रतीत होता है कि प्रकृति केवल दृश्य नहीं, दिव्यता का प्रत्यक्ष साक्षात्कार है। हे मानव! यदि चमत्कारों की खोज में तू दूर-दूर तक भटक रहा है, तो एक बार मौन होकर किसी नदी के तट बैठ, किसी वृक्ष की छाया में श्वास ले, किसी पुष्प की सुगंध को आत्मा में उतरने दे। तुझे ज्ञात होगा— सबसे महान चमत्कार आकाश में नहीं, धरती पर नहीं, अपितु उस चेतना में है जो प्रकृति के प्रत्येक कण में परमात्मा का स्पर्श अनुभव कर लेती है। प्रकृति का प्रत्येक क्षण एक वेद है, प्रत्येक ऋतु एक उपनिषद्, प्रत्येक पुष्प एक प्रार्थना, और प्रत्येक प्राण….. सृष्टिकर्ता के अनंत प्रेम का अविनाशी चमत्कार। ********* स्वरचित कविता दीपा सिंह गौतम ❤️ गंजबासौदा मध्य प्रदेश से 🌷

सर्वश्रेष्ठ Hindi Poetry on Muktika Publication

सर्वश्रेष्ठ सर्वश्रेष्ठ खोज है इंटरनेट ,सबको अपने वश में कर लिया। बच्चों के हाथ से बैट छीन कर ,गेम खेलने मोबाइल से नाता जोड़ दिया युवाओं के आंखों में ऑफिसर बनने के सपनों के बदले ,यूट्यूबर बनाकर लाखों कमाने के सपने सजा दिया।हम हो गए इसके इतने आदि हर खोज इससे करने लगे,अपने आसपास की … Read more