स्त्री
तुम मत बदलना
फनी रहना तुम
प्यारी सी पुत्री
स्नेहमयी बहन
ममतामयी मां
समर्पित पत्नी होकर
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तुम खाद हो
समाज में पनपने वाले
विचार रूसी उन पौधौं की
जो कभी बहुमुल्य
विचारों की छाया से
ठंडक प्रदान करती है
परिवारों समाज के आक्रोश की
उष्णता से प्रभावित
परिवेश को
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तुम कत्ल करने के लिए
नहीं बनाई बनाई गई
तुम रचयिता हो सृष्टि की
अधिकांश सृष्टि व्यवस्थित है
स्त्रीत्व के भाव से ही
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तुम्हारा कठोर हो जाना
अर्थात
आसमान से अग्नि के
बरसने के सदृश होगा
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दुनिया ने महसूस किया है
जब जब पुरुष तत्व पर
हावी हुआ आक्रोश
स्त्री तत्व के स्पर्श मात्र से
द्रवित हो पुरुषत्व
समाज को नई दिशाएं
दिखाता आया है
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स्त्री
तुम स्त्री ही बने रहना
अन्यथा तुम्हारा स्त्री न रहना
घातक होगा इस धरा के लिए
धरती समा जाएगी रसातल में
रवि गौतम “अनादि”







