अधूरे सपने
*अधूरे सपने* बचपन की धूप में एक सपना पलता था, हाथ में बल्ला था, दिल में आस जलता था। हर गली मेरा छोटा-सा मैदान बन जाती, हर जीत मेरी दुनिया को मुस्कुराती। मैं भी नीली जर्सी पहनना चाहता था, तिरंगे के लिए मैदान में उतरना चाहता था। हर चौके पर माँ की आँखें चमकतीं, हर … Read more