विज्ञान श्री माया

में काई सुनावा थाने विज्ञान रा नफा ने नुकसान ,

मैं तो ठहरियो गाम रा अल्लहड किसान ,

मैं बोला गाम री जुबानी ईशान रे भाया,

या चार्ली जब से मोबाइल की लहरा

कलयुग- एकता चतुर्वेदी Emotional Poetry by Muktika Publication

शीर्षक-कलयुग यहां सत्य का कोई साथी नहीं,सब बन बैठे असत्य के साथी है,यहां रिश्तों का कोई मोल नहीं,आया देखो ये कैसा कलयुग है।।पति के जाते ड्यूटी पर पत्नी,गैर मर्द के साथ रात बिताती है,यहां कोई रिश्तों का मोल नहीं,आया देखो ये कैसा कलयुग है।।यहां पति भी पत्नी से कम नहीं,वो भी देता पत्नी को खूब … Read more

कलयुग कविता- Dr. Rishika Verma Beautiful Poem only on Muktika Publication

विषय: कलयुगकलयुग है ये धर्म की डोरी कमजोर है, पापों की अब भरमार है,सत्य ढूँढने निकले जो, पथ में उनके अंधकार है।नेता बोले मीठे बोल, भीतर लेकिन विष का जाल है,नीति, मर्यादा, शर्म-संकोच सब यहाँ बिकते है सब दलाल है। लोभ बना है भगवान यहाँ, माया ने सबको घेरा है। रिश्ते-नाते छूट गए हैं, मतलब … Read more

The Dreams Left Unfulfilled of Adhira- Sunitha Viswanaathan “Inspirational” story only on Muktika Publication

The Dreams Left Unfulfilled of Adhira Adhira was never a girl without dreams but as she started getting ideas, one of her dreams began blooming in her mind like a flower to plant more trees and keep her neighbourhood clean. She dreamt of a world in which children played in the shade of tall green trees, families had … Read more

महकती रात का रहस्य भाग-1 Horror Story only on Muktika Publication Exclusive

हमारे आसपास कुछ ऐसी अप्रत्याशित घटना हो जाती है, जिसका हमें पता नहीं रहता और वह ऐसे भुला दी जाती है। यह कहानी है शिल्पा और देवेन की शादी हुई,शिल्पा बहुत ही सुंदर थी। घर में भरा-पूरा परिवार सास, देवर सभी थे, ससुर जी का बहुत पहले देहांत हो गया था। शिल्पा जितनी सुंदर थी, … Read more

मुक्तिका पब्लिकेशन द्वारा श्री राम नवमी पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया

मुक्तिका पब्लिकेशन द्वारा श्री राम नवमी पर विशेष काव्यपाठ का आयोजन सम्पन्न हुआ मुक्तिका पब्लिकेशन परिवार द्वारा “श्री राम नवमी” पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसके संस्थापक अजय कुमार द्विवेदी , कानपुर , उ. प्र. एवं सह संस्थापक ममता जायसवाल रायपुर, छत्तीसगढ़ ने बताया भारत वर्ष के अलग राज्यों से रचनाकारों ने भगवान श्री … Read more

संसार- सृष्टि राठौर beautiful poetry on Muktika Publication

अर्ज किया है..आप ने रचा है संसार को,आप के बिना संसार कहा,आपके चरणो की धुल भी सोना लगे,आपसे मिलने के बाद अहंकार कहा,अल्लाह, भगवान, जीसस अनेकों नाम है आपके,आपका एक नाम कहां,आप साथ रहते हो हमेशा मेरे, और कोई मेरे साथ कहां, हज़ारों शूरवीरों से परे,कोई आपसे ज्यादा बलवान कहां,आपके इशारे के बिना एक पत्ता … Read more

दर्पण ग़ज़ल- डॉ संजीदा खानम शाहीन Beautiful Ghazal on Muktika Publication

विषय दर्पण विद्या : ग़ज़लदर्पण तो हकीकत से हैरान नज़र आता है।हीरा है या पत्थर है अंजान नज़र आता है।दिल की जमी पे देखो पहरे यहां हजारों,इस ओर हर बशर ही हैवान नजर आता है ।धोखे मिले हैं इतने किस पर यकीन कर लूं,इंसान भी यहां अब शैतान नज़र आता है।दर्पण बता रहा है बदहाली … Read more