ग़ज़ल
विश्वासघात
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दर्पण ग़ज़ल- डॉ संजीदा खानम शाहीन Beautiful Ghazal on Muktika Publication
विषय दर्पण विद्या : ग़ज़लदर्पण तो हकीकत से हैरान नज़र आता है।हीरा है या पत्थर है अंजान नज़र आता है।दिल की जमी पे देखो पहरे यहां हजारों,इस ओर हर बशर ही हैवान नजर आता है ।धोखे मिले हैं इतने किस पर यकीन कर लूं,इंसान भी यहां अब शैतान नज़र आता है।दर्पण बता रहा है बदहाली … Read more