Gazal

Gazal ग़ज़ल है चुप-चुप आसमाँ, कम रोशनी है,किसी की याद हर धड़कन बनी है। बँटवारा चलन ही बन चुका है अब,न साबित रात, टुकड़े चाँदनी है। ना हल्के में घटाओं को समझना,गुँथी उनकी लटों में दामिनी है। है रूठा जो समंदर, कुछ वजह है,कोई ज़िद तो फ़िज़ाओं में ठनी है। जो खुशियों के तराने चाहते … Read more

दर्पण ग़ज़ल- डॉ संजीदा खानम शाहीन Beautiful Ghazal on Muktika Publication

विषय दर्पण विद्या : ग़ज़लदर्पण तो हकीकत से हैरान नज़र आता है।हीरा है या पत्थर है अंजान नज़र आता है।दिल की जमी पे देखो पहरे यहां हजारों,इस ओर हर बशर ही हैवान नजर आता है ।धोखे मिले हैं इतने किस पर यकीन कर लूं,इंसान भी यहां अब शैतान नज़र आता है।दर्पण बता रहा है बदहाली … Read more