कलयुग- एकता चतुर्वेदी Emotional Poetry by Muktika Publication

शीर्षक-कलयुग यहां सत्य का कोई साथी नहीं,सब बन बैठे असत्य के साथी है,यहां रिश्तों का कोई मोल नहीं,आया देखो ये कैसा कलयुग है।।पति के जाते ड्यूटी पर पत्नी,गैर मर्द के साथ रात बिताती है,यहां कोई रिश्तों का मोल नहीं,आया देखो ये कैसा कलयुग है।।यहां पति भी पत्नी से कम नहीं,वो भी देता पत्नी को खूब … Read more