Abhi is lekh ko 84 log padh rahe hain

एक ना एक दिन

एक ना एक दिन एक ना एक दिन यह बदली छँट जाएगी, धुंधली सी यह रात भी थम जाएगी। जो अश्क आँखों में आज ठहरे हैं, उनमें खुशियों की नई धूप मुस्कुराएगी। वक्त के इस कठिन इम्तिहान का, एक ना एक दिन कोई सिला आएगा। टूटे हुए इन सपनों के मलबे से, फिर उम्मीदों का … Read more