वक्त की दहलीज पर Part 1
वक्त की दहलीज पर Part 1 रात के ग्यारह बज चुके थे। चारों तरफ गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था, बस रह-रहकर खिड़की से टकराती हुई ठंडी हवा की सरसराहट उस खामोशी को तोड़ रही थी। कमरे में जलती हुई एक छोटी सी मेज-बत्ती की मद्धम रोशनी पूरे कमरे को एक रहस्यमयी माहौल दे रही थी। … Read more