दिनांक: 3 सितंबर 2026
विषय : माँ की ममता
इस दुनिया में एक माँ का प्यार सबसे अनमोल होता है। आज हम आपके लिए लेकर आए हैं ‘माँ की ममता’ और एक बेटे के आत्मीय प्रेम पर आधारित एक बेहद भावुक कहानी, जो निश्चित ही आपकी आँखें नम कर देगी।
पुरानी साड़ी और माँ का निस्वार्थ प्रेम
संध्या का समय था। घर के आंगन में हल्की धूप बिखरी हुई थी। विद्या देवी अपनी पुरानी अलमारी के एक कोने में रखी हुई सूती साड़ी को सुई और धागे से बड़े करीने से रफू कर रही थीं। साड़ी कई जगहों से घिस चुकी थी, फिर भी उनके हाथ सधी हुई रफ्तार से चल रहे थे।
तभी उनके छोटे बेटे अभय ने बाहर से आवाज लगाई, “माँ, सुई-धागे का डिब्बा कहाँ रखा है? मेरा एक कोट थोड़ा सा उधड़ गया है, मुझे टांका लगाना है।”
विद्या देवी ने रसोईघर की तरफ से ही आवाज दी, “अरे बेटा, बड़े बक्से वाले खाने में रखा है, ले लो। लेकिन बात क्या है, कोई नया कोट ले लेते या दर्जी को दे देते, इसे खुद क्यों सिलने चले?”
Read More: शिक्षा का दीपक

बेटे का वो सीधा और गहरा सवाल
अभय ने डिब्बा निकाला और माँ के पास आकर बैठ गया। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “माँ, आप भी अजीब हो! आपका यह पुराना चंदेरी दुपट्टा और यह घिसी हुई साड़ी पिछले कितने सालों से सिल-सिलकर पहन रही हो, तब तो कभी नहीं कहा कि इसे फेंककर नया ले लूँ। और बात जब मेरे कोट की आई, तो तुरंत नया लाने की सलाह दे डाली। ऐसा क्यों?”
अभय के इस सीधे और गहरे सवाल पर विद्या देवी एक पल के लिए मौन हो गईं। उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था। क्योंकि एक माँ की ममता और उसका पूरा जीवन अपने बच्चों की खुशियों को संवारने में ही बीत जाता है, अपने लिए सोचना तो वह जैसे भूल ही जाती है।
विद्या देवी को इस प्यारे से असमंजस में छोड़कर अभय अपने जरूरी काम से बाजार निकल गया।
जब बेटे ने चुकाया माँ के प्यार का मोल
कुछ ही घंटों बाद जब अभय लौटा, तो उसके हाथों में एक बड़ा सा लिफाफा और एक पैकेट था। उसने घर में प्रवेश करते ही सबसे पहले वह पैकेट अपनी माँ की ओर बढ़ाया। विद्या देवी ने जब उसे खोला, तो अंदर से एक बहुत ही सुंदर, चमकीले लाल रंग की मखमली चुनरी निकली, जिस पर सुनहरे सितारों का काम किया हुआ था।
अभय ने प्रेम से वह चुनरी माँ के कंधों पर ओढ़ा दी और उनके चरणों में झुककर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उसने एक और थैली उनकी गोद में रख दी। उस थैली में विद्या देवी की पसंद की दो बेहद खूबसूरत और नरम साड़ियाँ थीं— एक हल्के केसरिया रंग की और दूसरी सुनहरे बॉर्डर वाली मखमली पीली साड़ी।
ग्रीटिंग कार्ड का भावुक संदेश
साड़ियों के साथ एक छोटा सा ग्रीटिंग कार्ड भी था, जिसे खोलते ही अभय ने उसमें लिखी पंक्तियाँ पढ़कर सुनाईं:
“माँ पार्वती बनकर हर पल जिसने मुझे संभाला है, माँ सरस्वती बनकर जीवन का हर पाठ मुझे पढ़ाया है, मेरी हर मुश्किल के आगे जो दुर्गा और काली बनके डट जाती है, और लक्ष्मी बन अपना सारा स्नेह मुझपर लुटाती है… ऐसी मेरी पूजनीय प्यारी माँ को जीवन के हर सुख की असीम शुभकामनाएँ!”
निष्कर्ष: माँ की ममता और आँखों में आंसू
बेटे के इन अनमोल शब्दों को सुनकर और उसके दिल से निकले इस आत्मीय उपहार को देखकर विद्या देवी का गला भर आया। माँ की ममता के आंसुओं से उनकी आँखें नम हो गईं। वह अपने बेटे को सीने से लगा, बस यही सोचती रह गईं कि भगवान हर जन्म में उन्हें ऐसा ही संवेदनशील और समझदार बेटा दे।
मन को छू लेने वाली पंक्तियाँ:
उम्र भर जो अपनों की खातिर अपने अरमान छिपाती है, वो माँ ही है जो हर मौसम में बस ममता बरसाती है। दौलत शोहरत से बढ़कर दुनिया में बस एक ही धाम है, जिसकी छांव में सिमट जाए हर गम, वो विद्या का पावन नाम है।
©️ लेखिका: रेखा तोमर, मैहर दिनांक: 3 सितंबर 2026









3 thoughts on “माँ की ममता”