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नवरात्रि शक्ति

Kuldeep Singh • Superstar Writer • Sahitya Ratna

नवरात्रि शक्ति

शक्ति प्रकृति के कण-कण में मौजूद हैं।
विवेक भी एक शक्ति है।
विधा भी एक शक्ति है, ललित कला भी शक्ति है। अर्थ का ज्ञान विज्ञान भी एक शक्ति है।
भोजन को पटाना भी एक शक्ति है। किसी भी कला में निपुणता एक शक्ति है, समाज परिवार और देश को एक सूत्र में पिरोकर कर रखना एक शक्ति है। बिना शक्ति के जब इंसान का सांसारिक जीवन भी अपूर्ण हैं, तो आध्यात्मिक जीवन कैसे पूर्ण हो सकता है ‌‌्यह बात याद रखनी चाहिए की जब तक मनुष्य के भीतर इस पराशक्ति का जागरण नहीं होता है तब तक मनुष्य का जीवन एक पशु पक्षी की भांति आहार निद्रा भय और भोग का सेवन करने तथा पदार्थों का संग्रह करने में ही व्यर्थ हो जाता है। इसी शक्ति के जागरण हेतु हमारे ऋषि मुनियों ने नवरात्रि का नौ दिवस का अनुष्ठान दिया है,ताकि पहले दिन से लेकर नवमी तक उपवास और साधना का मानसिक जीवन जीने का अवसर मनुष्य को मिले।

Kuldeep singh

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Author

Muktika Sahityakar