तोंदू जी की तोंद मटके जैसे गोल हास्य कविता

*शीर्षक,,, तोंदू जी की तोंद मटके जैसे गोल,:-* *हास्य कविता:-* “””“””””“”””””””””””””””””””””‘”” तोंदु जी की तोंद हे या अलमारी, या लगी तुम्हें भी इश्कि बीमारी । हंसते हंसते ये तोंदू हो गई भारी , तभी हास्य व्यंग करे दुनिया सारी । ये दादी के मटके जैसे गोल हैं, देखो बीच में मची हुई पोल है। मतवाली … Read more