मौन की दहलीज़

मौन की दहलीज़ मन की सूनी चौखट पर अब, आकर दीप जलाओ ना, बुझते रिश्तों की साँसों में, फिर से प्राण बसाओ ना। मैंने अपने हर सपने को, तुम्हारे नाम सजाया ना, तुम अपने मौन से लेकिन, मुझको बहुत रुलाओ ना। इतनी बात कहाँ से लाऊँ, तुम भी तो कुछ बोलो ना। मन के बंद … Read more