वफ़ा के बदले विश्वासघात

*क्रमांक 15*

*दिनांक__18__8__2026*

*दिन__मंगलवार*

*विधा__कविता*

*विषय__विश्वासघात*

*रचनाकार__एकता चतुर्वेदी*✍🏻

*घोषणा मौलिक एवं स्वरचित*

*रचना*

जिसे अपना समझकर दिल का राज़ बताया था,

उसी ने मेरे भरोसे को बाज़ार में सजाया था।।

हमने तो रिश्ते को साँसों की तरह निभाया,

उसने हर मोड़ पर बस अपना मतलब पाया था।।

मैंने उसकी हर बात को सच मान लिया,

उसकी खामोशी को भी एक राज़ मान लिया।।

वो बदलता रहा धीरे-धीरे मेरी आँखों के सामने,

और मैंने उसे फिर भी अपना खास मान लिया।।

कभी उसकी मुस्कान में अपना सुकून मिलता था,

उसकी बातों से हर दर्द जैसे कम होता था।।

फिर एक दिन वही शख़्स अजनबी बन गया,

जिसके बिना एक पल भी मुश्किल होता था।।

शिकायत उससे नहीं, खुद से ज़्यादा है,

कि मैंने गलत इंसान पर भरोसा किया।।

जिसे समझा था अपने जीवन का हिस्सा,

उसने ही मुझे सबसे ज़्यादा तन्हा किया।।

विश्वास टूटे तो आवाज़ नहीं होती,

बस इंसान अंदर से थोड़ा बदल जाता है।।

चेहरे पर मुस्कान फिर भी रहती है,

पर दिल किसी पर जल्दी भरोसा नहीं करता है।।

अब न किसी से वादों की उम्मीद है,

न रिश्तों से पहले जैसी कोई उम्मीद है।।

जो साथ रहे, उसका शुक्रिया दिल से,

जो छोड़ गया उससे भी कोई शिकायत नहीं।।

क्योंकि विश्वासघात ने एक बात सिखाई,

हर अपना, हमेशा अपना नहीं होता।।

कुछ लोग मिलते हैं सबक बनकर ज़िंदगी में,

हर रिश्ता मंज़िल तक साथ नहीं होता।।

अब टूटे हुए भरोसे को जोड़ना नहीं है,

हर पुराने दर्द को फिर से ओढ़ना नहीं है।।

जिसने जाना था, उसे जाने दिया हमने,

अब खुद को किसी के लिए खोना नहीं है।।

कल तक जो अपना था, आज याद बन गया,

एक खूबसूरत रिश्ता भी फ़रियाद बन गया।।

दिल ने कहा उसे भूल जाना आसान नहीं

वक्त ने कहा मगर यही तो ज़िंदगी का इम्तिहान है।।

*एकता चतुर्वेदी ✍🏻*

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