प्रतिदिन लेखन आज का विषय विश्वासघात
दिनाँक 18-8-26
मंगलवार
विश्वासघात
हम कभी भी किसी के साथ कुछ भी करें पर किसी के साथ विश्वासघात ना करें। किसी इंसान ने हम पर भरोसा किया और हमने उसके साथ विश्वासघात कर दिया। तो सोचिए उस पर क्या बीतेगी। विश्वासघात से बड़ा कोई पाप कोई दूसरा नहीं है। क्योंकि आपने उसके विश्वास पर ही आघात कर दिया।
एक बार एक किसान अपनी सारी जमीन अपने मित्र के पास गिरवी रख देता है। क्योंकि उसकी बेटी की शादी होने वाली थी तो उसे उसके विवाह के लिए पैसों की जरूरत थी। वह गाँव के साहुकार के पास ना रखकर की साहुकार क्या पता उसके साथ धोखा ना कर दे वह अपने मित्र के पास गिरवी रख देता है उसके बदले में उससे कुछ पैसे ले लेता है।
किसान को अपने मित्र पर पूरा भरोसा था कि वह उसे धोखा नहीं देगा क्योंकि वे दोनों बचपन से ही साथ खेले बड़े हुये थे। किसान की जमीन बहुत उपजाऊ थी इसलिए वह उसे खोने से डरता था। किसान के मित्र ने भी खुशी से उसकी जमीन गिरवी रख दी और किसान ने जितने पैसे माँगे उससे एक पेपर पर अँगूठा ले कर उसे दे दिए। किसान उस पर खेती करता रहा फसल से जो आमदनी होती उसमें से एक निश्चित भाग अपने मित्र को दे देता उसका कर्ज उतारने के लिए।
कुछ समय बाद किसान का बेटा शहर में नौकरी करने लगा और उसने बैंक से ऋण ले लिया और जमीन छुड़ाने अपने पिता के साथ उनके मित्र के घर गया। और उसके बचे हुए सारे पैसे उसे देकर उससे अपनी जमीन के काग़ज माँगे तो उसके मित्र ने जो उससे कहा उसे सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गयी।
किसान के मित्र ने किसान से कहा कि उसने जमीन गिरवी नहीं रखी बल्कि उसे बेच दी थी। वो तो तेरे पास आय का कोई और साधन नहीं था इसलिए मैं तुझे उस जमीन पर खेती करने से रोक नहीं रहा था। अब तेरा बेटा कमाने लगा है तो तुरन्त मेरी जमीन मुझे वापस दे दे।
किसान ने उससे कहा उसने तो जमीन सिर्फ गिरवी रखी थी बेची नहीं थी। पर उसका मित्र नहीं माना और उसने किसान के अँगूठा लगे कागज उसके सामने रख दिए। जब किसान के बेटे ने वे कागज पड़े तो सच में उनमें लिखा था कि किसान ने ये जमीन उसे बेच दी है।
कागज भी थे जमीन बेचने के किसान के मित्र के पास और उसने किसान को रुपये दिए थे इसके प्रमाण भी थे और गवाह भी जिनके सामने उसने किसान को पैसे दिए थे। ये सब देखकर किसान अपने तो ठगा सा महसूस करने लगा था।
उसके पास आय का कोई और साधन नहीं था बेटा अभी नौकरी लगा था। एक बेटी की शादी हुयी थी दो बेटियाँ और एक छोटा बेटा और थे। वह अब उनका भरण – पोषण ही कैसे करेगा ये दो सोचकर किसान का दिन का चैन और रात की नींद उड़ गयी। उसे बहुत तनाव होने लगा और एक दिन इसी तनाव में उसने आत्महत्या कर ली।
किसान के मित्र ने उसके साथ विश्वासघात किया और अपने मित्र पर विश्वास करने की क़ीमत किसान ने अपनी जान देकर चुकाई। इसलिये किसी के साथ कभी भी विश्वासघात नहीं करना चाहिए। हमें चाहे लोग कुछ भी कहें पर विश्वासघाती कभी नहीं कहें।।
विश्वासघात का परिणाम आपने रामायण में भी देखा है। विभीषण ने अपने भाई रावण के साथ विश्वासघात किया जिसके कारण उसका पूरा कुनबा खत्म हो गया। आज भी लोग अपने बच्चे का नाम विभीषण नहीं रखते हैं।
इसलिए कभी भी विश्वास घाती ना बने। क्योंकि अगर आप एक बार विश्वास घात करते हैं तो फिर कभी कोई भी आप पर विश्वास नहीं करेगा। इसलिये विश्वास पात्र बनिये ना कि विश्वासघाती।
धन्यावाद
भावना भट्ट
प्रस्तुति नंबर – 26 (छब्बीस )
18-8-26
मंगलवार
स्वरचित और मौलिक रचना







