अधूरा सपना -Anjali Saxena Motivational Story only on Muktika Publication


अधूरा सपना सपना देखना जो कि हम अक्सर नींद में सोते हुए देखते हैं आशीर भी होता है कि ऐसा कैसा सपना देखा परंतु कुछ ऐसी हालत है परिस्थितियों बनने लगती है जो कि हमारे सपनों को आकृति प्रेम बनाने में लगती है लगती है यह न सोचे कि सपना एक ही होगा जो सपने बाल्यावस्था में सोचे होंगे या खेल होंगे वही आपका भविष्य उन रास्तों की ओर अग्रसर होने लगता है। परंतु सब अधूरे एक समय तक रहते हैं कुछ टुकड़ों में मिलेंगे तो कुछ आधे पर कुछ ना कुछ सीखने जाएंगे कभी रास्ते सीधे चलेंगे तो कुछ भटकेंगे वह तेरे मेरे या तितली सॉन्ग पकाने को प्रोत्साहित करेंगे दोस्तों सपना चाहे जैसा भी हो पर मेहनत भी करना अनिवार्य होता है चाहे ज्ञान बढ़ाने की मेहनत हो माता-पिता की मर्यादित मेहनत हो संस्कार संस्कारों की पूर्णता धैर्य मजबूती सरलता उदार वह साहस कुछ करने का हौसला चाहे पतंग उड़ाने का या मिट्टी से खेलने समझने वाली बात यह है कि पूत के पाव पालने में दिख जाते हैं।

अंजलि सक्सेना….. प्रबल

नवी मुंबई …..महाराष्ट्र।

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