हनुमान जन्मोत्सव
हनुमान, शक्ति के सागर, भक्ति के सच्चे सिपाही,
जिनकी भक्ति की गूंज, जैसे गूंजे गगन में गूढ़ राही।
राम के चरणों में बसी, उनकी अनन्य निष्ठा,
जन्मोत्सव मनाते हम, करते हैं उनकी आराधना।
जन्मोत्सव का यह पर्व, जैसे बहारों की पहली किरण,
संग लाता है सबको, जैसे चाँद लाए रात की चादर।
भक्ति की महक से महके, हर गली, हर आँगन,
हनुमान की जयकार से, गूंजे हर मन, हर संग।
शक्ति के प्रतीक, जैसे पर्वत की ऊँचाई,
संकट में जो साथ दें, जैसे सागर की गहराई।
लंका की ओर कूदे, जैसे पंखों वाली चिड़िया,
हर बाधा को पार करे, जैसे बहती नदिया।
राम का संदेश लाए, जैसे बूँदें लाए सावन,
संजिवनी की खोज में, जैसे हो कोई अनमोल रतन।
उनकी वीरता की गाथाएँ, सुन सुन मन में बसी,
हर दिल में बसी है, जैसे चाँदनी रात की कसी।
पूजा की थाल सजती, जैसे फूलों की महक,
भक्तों का संगम होता, जैसे नदियों का मिलन।
हर हृदय में बसी है, उनकी अद्भुत छवि,
संकट में जो देते, जैसे माँ की गोद की सुकून भरी।
एकता का यह पर्व, जैसे रंग-बिरंगे फूल,
सभी मिलकर गाते हैं, जैसे बाग में बजी बांसुरी।
हनुमान की कृपा से, हो जीवन में सुख और शांति,
उनकी महिमा का गुणगान, जैसे गूंजे हर कंठ की भक्ति।
हे हनुमान, कृपा करो, हर मन में भर दो विश्वास,
आपकी भक्ति से सजे, जीवन के हर एक आस।
जन्मोत्सव की इस बेला में, हम सब मिलकर करें प्रार्थना,
आपकी शक्ति और भक्ति से, हो जीवन में सदा समृद्धि का आना।
"भक्ति में है शक्ति, संकट में है संजीवनी,
हनुमान की कृपा से, हर मन में हो सच्ची खुशी।"