मेरा परिवार

#मेरा परिवार

देखा था मैंने एक सपना ,
एक छोटा सा घर हो अपना ।
हो एक आंगन खुला हुआ ,
खेलें नन्ही मुन्नी बाल गोपाल।
आंगन में हो छोटी तुलसी ,
द्वार खड़ा बरगद विशाल ।
चंपा , चमेली , रात की रानी ,
आंगन में झरें रोज़ हरश्रृंगार ।
गूंजे बच्चों की किलकारी ,
द्वार पर बोलें मुखिया हमार ।
स्वर्ग से सुंदर घर आंगन हो ,
बुजुर्ग हमारे देवता समान ।
इससे ज्यादा और क्या होगा
मानव का कोई अरमान ।
देखे हुए सपने हुए साकार ,
सुखी समृद्ध है मेरा परिवार।

स्वरचित
लिटरेरी जनरल सरिता कुमार , Saritakumar 954

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