#मेरा परिवार
मंदिर जैसा घर है अपना
जहां रहते हैं मेरे परमेश्वर
मेरे भगवान , मेरे बाल गोपाल
मेरी लक्ष्मी और मेरी सरस्वती
बसता है यहां खुशियों का ज़हान
होती है नित अमृत की वर्षा
बरसता है यहां प्रेम , प्यार
रहती है सबकी फिक्र व परवाह
रखता है हर कोई दूसरे का ख्याल
सभी में है लगाव और जुड़ाव
हर कोई करता है दूसरे से प्यार
अपने हिस्से का सब कुछ
बांटने को रहता है हर कोई बेताब
त्याग सिर्फ माता पिता ही नहीं करते
बच्चें भी करते हैं अपना सब कुछ कुर्बान
नहीं है यहां कोई छोटा
हर किसी का योगदान है एक दूसरे से बड़ा
पांच अंगुलियों की मुट्ठी है एक बड़ा मिसाल
हमारा प्यारा छोटा सा घर बड़ा अनोखा है परिवार
होता है यहां हर पल खुशियों की बरसात ।
स्वरचित
लिटरेरी जनरल सरिता कुमार Saritakumar 954
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